भाकृअनुप – राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीति अनुसंधान संस्थान

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली में कृषि आर्थिकी और नीति अनुसंधान को मजबूती प्रदान करने के लिए मार्च, 1991 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा भाकृअनुप – राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीतिअनुसंधान संस्थान (ICAR-NIAP)(पूर्व में केन्द्र) की स्थापना की गई थी। भाकृअनुप – राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीतिअनुसंधान संस्थान (ICAR-NIAP) के मुख्य लक्ष्यों में विज्ञान प्रेरित कृषि एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में कृषि अनुसंधान व विकास तथा नीति अनुसंधान की योजना तैयार करने व मूल्यांकन में अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों का अनुप्रयोग करना शामिल रहा है। यह संस्थान कृषि नीति अनुसंधान के सुदृढ़ीकरण में, अनुभवजन्यु सुदृढ़ नीति अनुसंधान करने में और नीतिगत निर्णयों के लिए जानकारी आधारित आदान प्रदान कराने में एक अग्रणी भूमिका सुलभ कराने के प्रति प्रतिबद्ध है। साथ ही यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के थिंक टैंक के रूप में भी कार्य करता है और नीति निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने हेतु परिषद की मदद करता है।

मुख्य क्षेत्र

अपने विजन ‘कृषि विकास के लिए नवोन्मेष एवं नीति का लाभ उठाना’ को महसूस करते हुए संस्थान का फोकस निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर है :-



उल्लेखनीय उपलब्धियां



अनुसंधान विशेषताएं


खेती से मिलने वाले लाभ पर सूचना का प्रभाव

कृषि अनुसंधान एवं विकास पर किए गए निवेश में खेत उत्पादकता को बढ़ाने और गरीबी को कम करने की उल्लेखनीय क्षमता होती है। सूचना का उपयोग करने वाले किसानों की 12 प्रतिशत अधिक शुद्ध आय से उन्हें वर्ष 2002-03 के मूल्यों पर प्रति हेक्टेयर के फसल क्षेत्र से रूपये 1140 की अतिरिक्त् आमदनी हासिल हुई। यह सार्वजनिक प्रसार सेवा (रूपये 29 प्रति हेक्टे यर) तथा साथ ही अनुसंधान व शिक्षा पर किए गए खर्च (रूपये 157 प्रति हेक्टेोयर) की तुलना में कहीं ज्यादा है। इससे पता चलता है कि सार्वजनिक प्रसार सेक्टर में किए गए निवेश में किसानों द्वारा सूचना के लिए बढ़ रही मांग के तारतम्यु में गति नहीं बनाई रखी जा सकी और सार्वजनिक प्रसार में कम निवेश करने के कारण ही कृषि अनुसंधान पर कहीं अधिक खर्च करने से भी कृषि उत्पा्दकता में सीमित क्षमता लाभ ही हासिल किया जा सका...... अधिक पढ़ें

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